Israel-Hamas War: कब और क्यों शुरू हुआ यह विनाशकारी युद्ध?
इजरायल और हमास के बीच छिड़ा वर्तमान युद्ध 7 अक्टूबर 2023 को शुरू हुआ था। यह संघर्ष दशकों पुराने इजरायल-फलिस्तीन विवाद का सबसे भीषण और विनाशकारी अध्याय बन गया है।
नीचे इस युद्ध के कारणों, घटनाओं और वैश्विक प्रभाव पर एक विस्तृत लेख दिया गया है:
इजरायल-हमास युद्ध: एक विनाशकारी संघर्ष की पूरी कहानी
1. युद्ध की शुरुआत (7 अक्टूबर 2023)
7 अक्टूबर 2023 की सुबह, जब इजरायल 'सिमचत तोराह' (एक धार्मिक उत्सव) मना रहा था, तब गाजा पट्टी से चरमपंथी संगठन हमास ने 'ऑपरेशन अल-अक्सा फ्लड' शुरू किया। हमास ने इजरायल पर हजारों रॉकेट दागे और उसके लड़ाके जमीन, समुद्र और हवा (पैराग्लाइडर) के रास्ते इजरायली सीमा में घुस गए।
इस हमले में लगभग 1,200 इजरायली नागरिक मारे गए और हमास ने 240 से अधिक लोगों को बंधक बना लिया। इसे इजरायल के इतिहास का "ब्लैक डे" और वहां का "9/11" कहा गया।
2. इजरायल की प्रतिक्रिया: 'ऑपरेशन स्वॉर्ड्स ऑफ आयरन'
इस हमले के जवाब में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने औपचारिक रूप से युद्ध की घोषणा की। इजरायल का मुख्य लक्ष्य हमास को पूरी तरह समाप्त करना और अपने बंधकों को छुड़ाना था। इजरायली वायुसेना ने गाजा पर भारी बमबारी शुरू की और कुछ ही दिनों बाद जमीनी सेना (IDF) ने गाजा के भीतर प्रवेश किया।
3. युद्ध के मुख्य कारण (ऐतिहासिक पृष्ठभूमि)
यह युद्ध अचानक नहीं हुआ, बल्कि इसके पीछे दशकों का तनाव है:
- अल-अक्सा मस्जिद विवाद: हमास ने इस हमले का मुख्य कारण यरूशलेम स्थित अल-अक्सा मस्जिद की पवित्रता का उल्लंघन और वहां इजरायली पुलिस की कार्रवाई को बताया।
- गाजा की घेराबंदी: 2007 से गाजा पट्टी इजरायल और मिस्र की कड़ी नाकाबंदी में है, जिसे हमास हटाना चाहता है।
- बस्तियों का विस्तार: वेस्ट बैंक में इजरायली बस्तियों के विस्तार ने भी फलिस्तीनियों में भारी असंतोष पैदा किया है।
- क्षेत्रीय राजनीति: कुछ विश्लेषकों का मानना है कि हमास का उद्देश्य सऊदी अरब और इजरायल के बीच होने वाले ऐतिहासिक शांति समझौते को रोकना था।
4. मानवीय संकट और गाजा की स्थिति
युद्ध के कारण गाजा पट्टी में स्थिति अत्यंत भयावह हो गई है:
- हताहत: गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, अब तक 30,000 से अधिक फलिस्तीनी मारे जा चुके हैं, जिनमें बड़ी संख्या महिलाओं और बच्चों की है।
- विस्थापन: गाजा की लगभग 23 लाख की आबादी में से 80% से अधिक लोग अपने घरों से बेघर हो चुके हैं।
- अकाल और स्वास्थ्य: भोजन, स्वच्छ पानी और दवाओं की भारी कमी है। अस्पताल मलबे में तब्दील हो चुके हैं और मानवीय सहायता पहुंचना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
5. अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और भू-राजनीति
दुनिया इस युद्ध पर दो धड़ों में बंटी नजर आई:
- अमेरिका और पश्चिमी देश: इन्होंने इजरायल के "आत्मरक्षा के अधिकार" का समर्थन किया, हालांकि बाद में नागरिक मौतों को लेकर चिंता जताई।
- मुस्लिम देश और रूस-चीन: अधिकांश अरब देशों ने तत्काल युद्धविराम की मांग की और फलिस्तीनी नागरिकों पर हो रहे हमलों की निंदा की।
- ईरान की भूमिका: ईरान समर्थित समूहों जैसे लेबनान के हिजबुल्लाह और यमन के हुती विद्रोहियों ने भी इजरायल के खिलाफ मोर्चा खोल दिया, जिससे युद्ध के क्षेत्रीय स्तर पर फैलने का खतरा बढ़ गया।
6. वर्तमान स्थिति और चुनौतियां
2024 और 2025 के दौरान भी यह संघर्ष अलग-अलग चरणों में जारी रहा। हालांकि बीच में कुछ समय के लिए 'युद्धविराम' (Ceasefire) हुआ और कुछ बंधकों की रिहाई हुई, लेकिन पूर्ण शांति अब भी कोसों दूर है। इजरायल का कहना है कि जब तक हमास खत्म नहीं होता, युद्ध जारी रहेगा, जबकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय एक "दो-राज्य समाधान" (Two-State Solution) की वकालत कर रहा है।
निष्कर्ष
इजरायल-हमास युद्ध ने न केवल मध्य पूर्व बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा को प्रभावित किया है। यह युद्ध आधुनिक इतिहास के सबसे जटिल मानवीय संकटों में से एक है। शांति के लिए जरूरी है कि दोनों पक्ष बातचीत की मेज पर आएं, लेकिन फिलहाल नफरत और प्रतिशोध की दीवारें बहुत ऊंची नजर आ रही हैं।
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